Wednesday, 11 April 2012

MILTE HAIN RAHI RAH MEN


मिलते हैं राही राह में   अपने  नसीब  से 
मिलते   हैं  राही राह में   अपने  नसीब  से 
कुछ  देते  हैं  गम  कुछ  ख़ुशी  अपने  नसीब  से 
मिलता  है  हमें  प्यार  भी  अपने  नसीब  से 
मिलिती  है हमें नफरत  भी अपने नसीब से
मिलते   हैं  राही राह में   अपने  नसीब  से 
कुछ  देते  हैं  गम  कुछ  ख़ुशी  अपने  नसीब  से 
 देते  है  साथ  जितनI भी  अपने  नसीब  से 
बिछर  जाते  हैं  तो  भी  अपने  नसीब  से 
मिलते   हैं  राही राह में   अपने  नसीब  से 
कुछ  देते  हैं  गम  कुछ  ख़ुशी  अपने  नसीब  से 
कुछ  दे जाते  हैं  नमी  आँखों  में 
 दे  जाते   ज़ख़्म  दिल  में 
जो  जिन्दंगी  भर  सूखते  नहीं 
कुछ  दे  जाते  हैं  ख़ुशी  और  प्यार  इतना 
जिसे ज़िन्दगी  भर  भूलते सकते  नहीं 
मुद्दत  के  बाद   भी  अकेले  में  याद    करके 
मुस्कराए  बगैर  रह  सकते  नहीं 
होता  है  यह   सब  अपने  नसीबन  से 
मिलते   हैं  राही राह में   अपने  नसीब  से 
कुछ  देते  हैं  गम  कुछ  ख़ुशी  अपने  नसीब  से 

मिला  है  यह  जिस्म  भी  अपने  नसीब  से 
मिला  है  परिवार  भी  अपने  नसीब  से 
मिला  है   हमसफ़र  भी  अपने  नसीब  से 
निभाया  है  अस्त  उसने  अपने  नसीब  से 
मिला  है  साथ  आप  सब  का  अपने  नसीब  से 
बैठे  हैं  आज  इस  महफ़िल  में  अपने  नसीब  से 
यiI  यii द् आते  रहेंगे   वोह   भी  अपने  नसीब  से 
बनता  है  नसीब  अपना   अपने  करम  से
 मिलते   हैं  राही राह में   अपने  नसीब  से 
कुछ  देते  हैं  गम  कुछ  ख़ुशी  अपने  नसीब  से 

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